आज आंख रोई तो मौत ने
मेरा हाथ थाम लिया ...
कहा निराश क्यूँ है...
अँधेरी काली रातो के बाद..
सूरज को निकलना ही है...
जिंदगी अनसुल्जी पहेली तो नहीं...
जिसे कोई ना सुल्जा सका...
अपने सब रिश्ते सब बंधन ...
निभा के तो आ...
जिन हो ने तुज को रुलाया है...
उन सब को हँसा कर तो आ...
जिंदगी से हार कर नहीं ...
उस कर हरा के तो आ...
फिर हम दोनों साथ चलेंगे...
उन सब को रोता हुआ छोड़ कर.....!!!!!!!
मेरा हाथ थाम लिया ...
कहा निराश क्यूँ है...
अँधेरी काली रातो के बाद..
सूरज को निकलना ही है...
जिंदगी अनसुल्जी पहेली तो नहीं...
जिसे कोई ना सुल्जा सका...
अपने सब रिश्ते सब बंधन ...
निभा के तो आ...
जिन हो ने तुज को रुलाया है...
उन सब को हँसा कर तो आ...
जिंदगी से हार कर नहीं ...
उस कर हरा के तो आ...
फिर हम दोनों साथ चलेंगे...
उन सब को रोता हुआ छोड़ कर.....!!!!!!!
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