वक्त की शाख से तोड़ कर...
रखे थे कुछ लम्हे
तुम भी कुछ उलझे रहे.....
हम भी कुछ मसरूफ से थे....
अब तो आ जाओ ...
के बहार फिर आने को है .....!!!!!!!
रखे थे कुछ लम्हे
तुम भी कुछ उलझे रहे.....
हम भी कुछ मसरूफ से थे....
अब तो आ जाओ ...
के बहार फिर आने को है .....!!!!!!!
No comments:
Post a Comment