एक तजुर्बा बुहत था...
जो सब कुछ सिखा गया ...
एक कारवां गुजरा था मुहब्बत का मेरे दिले बागबान पर..
जाते हुए बंज़र मेरे शहर को बना गया ....!!!
जो सब कुछ सिखा गया ...
एक कारवां गुजरा था मुहब्बत का मेरे दिले बागबान पर..
जाते हुए बंज़र मेरे शहर को बना गया ....!!!
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