Thursday, 12 May 2011

'' लो तेरे प्यार की ''


हर एक क़दम पर नई...
मुश्किलों का सामना...
जिंदगी करती गई...
जिन्दगी युही चलती रही...
रात की चादर ओड कर ...
जब चला गया सूरज ...
लो तेरे प्यार की तब भी जलती रही ...
ज़ख़्म तो भर गए वक़्त के साथ...
टीस तुज से बिछडने की बढती  गई ...
धुप में जला हुआ मुक़दर देख कर ...
छाव भी पास आने से डरती रही...
इस खंडर हुए दिल में ...
रीझ तुज से मिलने की बदती गई...
जिन्दगी युही चलती रही.....!!!!!!!


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